व्यावसायिक रूप से सल्फर क्यों इस्तेमाल होता है
सल्फर डाइऑक्साइड एक प्रिज़र्वेटिव है जो भूरा पड़ने से भी रोकता है। सुखाने से पहले अंगूरों को इससे उपचारित करने पर वे काले पड़ने के बजाय सुनहरे या हल्के भूरे रहते हैं, फफूंद की बढ़त धीमी होती है और शेल्फ़ लाइफ़ काफ़ी बढ़ जाती है। यह बड़े पैमाने पर और दूर तक भेजी जाने वाली व्यावसायिक किशमिश के उत्पादन के लिए उपयोगी है।
इसके बिना क्या होता है
बिना सल्फर के सुखाए अंगूर धूप में नमी खोते हुए स्वाभाविक रूप से ऑक्सीकृत होकर काले पड़ते हैं। इसीलिए हमारे ब्लैक पन्नीर बीज वाले सूखे अंगूर सुनहरे नहीं, गहरे, लगभग काले होते हैं। इसके बदले शेल्फ़ लाइफ़ कम होती है और हर बैच में थोड़ा फ़र्क रहता है, पर कोई रसायन का अवशेष नहीं मिलाया जाता।
क्या सल्फर सेहत के लिए मायने रखता है?
सल्फाइट नियामक सीमाओं के भीतर अनुमत खाद्य योजक हैं, लेकिन कुछ लोग इनके प्रति संवेदनशील होते हैं, खासकर दमा (अस्थमा) या सल्फाइट संवेदनशीलता वाले लोग, जिन्हें सूखे फल में बचे SO₂ से प्रतिक्रिया हो सकती है। बिना सल्फर वाले सूखे फल चुनने से यह चिंता पूरी तरह हट जाती है।
छोटा जवाब
सल्फर से उपचारित किशमिश हल्के रंग की रहती है और शेल्फ़ पर ज़्यादा टिकती है। हमारी जैसी प्राकृतिक रूप से धूप में सुखाई गई किशमिश गहरी हो जाती है, उसका स्वाद अलग होता है और उसमें कोई सल्फर नहीं मिलाया जाता। ज़्यादा प्राकृतिक उत्पाद के लिए यह हमारा सोचा-समझा समझौता है।
